Thursday, March 24, 2011

आर्ट कंजर्वेटर कैसे बनें



फिलहाल आर्ट कंजर्वेशन के मान्य पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर करवाया जाता है। इसमें प्रवेश लेने के लिए छात्र के पास 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। फाइन आर्ट्स और साइंस के स्नातक छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। इस क्षेत्र में पीएचडी कोर्स भी करवाया जाता है जिसके लिए छात्रों से 55 फीसदी अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री की माँग की जाती है। स्नातक में आर्ट विषय इस पाठ्यक्रम के लिहाज से उचित माना जाता है। कुछ संस्थान शॉर्ट टर्म कोर्स भी करवाते हैं।

अन्य योग्यताएँ
इस क्षेत्र में जाने के लिए शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ अन्य कई व्यक्तिगत गुणों का होना भी बहुत जरूरी है। किसी कला के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण, कला के प्रति सम्मान, लंबे समय तक कार्य करने की क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जिम्मेदारी जैसे गुण छात्र में होने बेहद जरूरी हैं।

क्या है कोर्स
पीजी डिप्लोमा, मास्टर प्रोग्राम तथा पीएचडी स्तर पर कार्बनिक रसायन, पेंटिंग्स एवं कला तकनीकी की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया जाता है। आजकल कंप्यूटर के चलते कई कलाकृतियों को उसमें भी सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे में कंप्यूटर की जानकारी भी छात्रों को दी जाती है। ये पाठ्यक्रम एक वर्ष, दो वर्ष अथवा 3-5 माह के होते हैं।

विदेश में भी माँग है
वैश्वीकरण के कारण आज विदेशी संस्थानों तथा वहां की कला तथा विरासत से जुड़े सरकारी विभागों में आर्ट कंजर्वेशन से जुड़े लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाते हैं। विदेश में लोग बहुत पहले से कला संरक्षण तथा उसको लंबे समय तक संभाल कर रखने की कोशिशों पर बल देते रहे हैं।

वेत
इस क्षेत्र में कम प्रोफेशनल होने के कारण कोर्स करते ही नौकरी मिलने की संभावना होती है। शुरुआती तौर पर एक कला संरक्षक को 10 से 12 हजार रुपए प्रतिमाह तथा उसके पश्चात कार्यकुशलता के हिसाब से वेतन बढ़ता है।

प्रमुख संस्थान

* नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ आर्ट कंजर्वेशन जनपथ, नई दिल्ली

* दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हैरिटेज रिसर्च एरिया, नई दिल्ली।

* अन्नामलाई यूनिवर्सिटी अन्नामलाई नगर, दक्षिणी अरकोट, चेन्नई।

* गाँधी ग्राम ग्रामीण यूनिवर्सिटी, गाँधीग्राम, तमिलनाडु।

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